Additional information
| परिकल्पना | हिमांशु सिंहल |
|---|---|
| कहानी एवं पटकथा | अविजित मिश्रा |
| चित्रांकन | जय खोहवाल |
| रंग-सज्जा | ज्योति सिंह |
| पृष्ठ संख्या | 36 |
Original price was: ₹640.00.₹544.00Current price is: ₹544.00.
-15%हिमांशु द्विज – आग से जन्मा
पुरातत्वेत्ता, डॉक्टर पुरंदर शर्मा को शोध में पता चलता है कि ड्रैगन्स कोई कल्पना नहीं बल्कि वास्तविकता थे। साथ ही अपनी खोज को प्रयोगों से जोड़ कर वे प्राप्त करना चाहते हैं एक ऐसी संतान जिसमें सभी मानवीय गुणों के साथ ड्रैगन्स कि शक्तियां भी शामिल हों। फलस्वरूप जन्म लेता है अजिंक्य जिसका पालन पोषण मठ में बौद्ध भिक्षुओं द्वारा किया गया। अपनी वास्तविकता से अनजान अजिंक्य ने अपनी पढाई बढ़ाने के लिए चुना है दिल्ली को। लेकिन वहां उसका इंतज़ार कर रहे हैं ऐसे खतरे जिसकी कल्पना भी उसने नहीं की थी। कैसे करेगा अजिंक्य अपने सामने आने वाले खतरों और अपने सच का सामना ?
द्विज 02 – वीरों का संग्राम
जब दिल्ली पर दुष्ट पिक्सियों का एक झुंड टूट पड़ता है, तो शहर में अफरा तफरी मच जाती है। लेकिन असली तूफान तब उठता है जब द्विज और गार्डियन्स की मुलाकात दिव्यवीर योद्धाओं से होती है — और दोनों ही टीमें एक दूसरे को उन पिक्सियों को नियंत्रित करने वाला दुश्मन समझ लेती हैं।
और फिर शुरू होता है एक महायुद्ध। शक्तियाँ भड़कती हैं, अहं टकराते हैं, और दोनों पौराणिक टीमें वह सब कुछ झोंक देती हैं जो उनके पास है — एक ऐसे संघर्ष में जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
इस भीषण संग्राम का अंत किसके पक्ष में जाएगा?
क्या वे समय रहते अपनी भूल समझ पाएँगे?
और इन शरारती लेकिन खतरनाक पिक्सियों के पीछे आखिर कौन सी अंधकारमयी शक्ति छिपी है?
इन सभी सवालों के जवाब मिलेंगे द्विज 02 – वीरों का संग्राम के धमाकेदार पन्नों में — जहाँ गलतफहमियाँ युद्ध को जन्म देती हैं, गठबंधनों की परीक्षा होती है, और नायक सीखते हैं कि कभी कभी असली दुश्मन वह होता है जो दिखाई ही नहीं देता।
| परिकल्पना | हिमांशु सिंहल |
|---|---|
| कहानी एवं पटकथा | अविजित मिश्रा |
| चित्रांकन | जय खोहवाल |
| रंग-सज्जा | ज्योति सिंह |
| पृष्ठ संख्या | 36 |
Reviews
There are no reviews yet.